यह आश्रम की पहली महिला रूपा है, जो मानसिक रूप से मंदबुद्धि है। इसे दूसरे राज्य से एक व्यक्ति शादी करके नारनौद, जिला हिसार लेकर आया था, जो झगड़ा समाज से संबंध रखता है। रोज़ाना होने वाले अत्याचारों से परेशान होकर इस महिला ने अपनी पहली बेटी नेहा के जन्म के बाद घर छोड़ दिया था। दूसरी बेटी को इसने नारनौद की सड़कों पर जन्म दिया, लेकिन उसे कोई अन्य व्यक्ति पालन-पोषण के लिए अपने साथ ले गया, जिसके बारे में आज तक किसी को कोई जानकारी नहीं है।

इसके बाद रूपा का जीवन लगभग 10 वर्षों तक नारनौद की सड़कों पर ही बीता। इस दौरान नशेड़ी लोगों द्वारा उसका लगातार शोषण किया जाता रहा, लेकिन गांव या परिवार के किसी भी व्यक्ति ने उसकी कोई सहायता नहीं की। इसी महिला की बदौलत “हमारा प्रयास आश्रम” की नींव 04/11/2023 को हिसार में किराये की बिल्डिंग में रखी गई।

आश्रम की बेटी नेहा, जिसकी उम्र 9 वर्ष है, लगभग 95% मानसिक रूप से मंदबुद्धि है। नेहा को “हमारा प्रयास आश्रम” की टीम द्वारा नारनौद, जिला हिसार से रेस्क्यू करके आश्रम में लाया गया। नेहा, आश्रम की पहली महिला रूपा की बेटी है। वह अपनी दादी के पास रहती थी और आस-पड़ोस के लोगों से रोटी मांगकर अपना पेट भरती थी। आश्रम में आने के बाद से ही नेहा “रेड क्रॉस” मंदबुद्धि बच्चों के स्कूल में पढ़ने जाती है। समय के साथ उसकी मानसिक स्थिति में काफी सुधार हो रहा है तथा उसकी दवाइयाँ भी अस्पताल से नियमित रूप से चल रही हैं।

यह “हमारा प्रयास मंदबुद्धि महिला अनाथ आश्रम” की तीसरी महिला है, जो गांव घुड़साल, जिला हिसार की रहने वाली है। गांव के सरपंच का हमारे पास फोन आया कि एक महिला गांव के बस स्टैंड पर दो दिनों से लगातार पड़ी हुई है, जो अपना नाम-पता नहीं बता पा रही और अत्यधिक नशे की हालत में है। “हमारा प्रयास आश्रम” की टीम गांव के सरपंच और अन्य ग्रामीणों की उपस्थिति में इस महिला को रेस्क्यू करके आश्रम लेकर आई। आश्रम में छह महीने रहने के बाद इसने अपना नाम “अनु” बताया। आश्रम में आने के बाद से इसकी मानसिक बीमारी की दवाइयाँ सिविल अस्पताल हिसार से चल रही हैं। यह महिला अत्यंत हिंसक स्वभाव की थी और इसने आश्रम की महिला स्टाफ को भी दो-तीन बार घायल कर दिया था।

इस लड़की का नाम पूजा गर्ग है, जो हिसार की रहने वाली है। बचपन में ही इसकी माता इसे छोड़कर चली गई थीं। यह लड़की 100% दिव्यांग है तथा बोल भी नहीं सकती। इसे बचपन से ही मिर्गी के दौरे आते हैं, जिसकी दवाइयाँ गुप्ता अस्पताल हिसार से चल रही हैं। इसे शौचालय आदि का कोई ज्ञान नहीं है। शुरुआत में जब इसे “हमारा प्रयास आश्रम” में लाया गया था, तब यह स्वयं को अपने दांतों से काट लेती थी तथा अन्य लोगों को भी काटती थी। समय के साथ इसकी काटने की आदत में सुधार हो रहा है और आश्रम की टीम लगातार इसके बेहतर भविष्य के लिए प्रयासरत है।

इस महिला की सूचना गांव झिरी के सरपंच अमित कुमार जी द्वारा “हमारा प्रयास आश्रम” की टीम को दी गई। उन्होंने बताया कि इस महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। यह लोगों के घरों के बाहर बैठ जाती है और वहीं शौच कर देती है, जिसके कारण पूरा गांव परेशान था। इसके परिवार में भी कोई इसकी देखभाल नहीं करता था तथा इसका पति अत्यधिक शराब पीकर इसके साथ मारपीट करता था, जिसके कारण इसकी हालत और खराब हो गई। “हमारा प्रयास आश्रम” की टीम ने गांव के सरपंच, ग्रामीणों तथा इसके परिवार की उपस्थिति में इसे रेस्क्यू करके आश्रम हिसार में लाया। आश्रम में लाने से पहले इसका मेडिकल परीक्षण भी करवाया गया। इसकी मानसिक बीमारी की दवाइयाँ हिसार अस्पताल से चल रही हैं।

इस महिला के बारे में हिसार रेलवे स्टेशन पर घूम रहे एक राहगीर द्वारा सूचना दी गई थी। यह महिला न बोल सकती है और न ही सुन सकती है। “हमारा प्रयास आश्रम” की टीम ने तुरंत इसे रेस्क्यू करके “हमारा प्रयास मंदबुद्धि महिला अनाथ आश्रम”, हिसार में लाया। उस समय महिला ने शरीर पर कोई वस्त्र नहीं पहने हुए थे तथा इसकी मानसिक स्थिति भी अत्यंत खराब थी। इसकी मानसिक बीमारी की दवाइयाँ हिसार अस्पताल से चल रही हैं।

इस लड़की की सूचना “हमारा प्रयास आश्रम” की टीम को रेलवे पुलिस द्वारा दी गई थी। यह लड़की लगभग एक महीने से लगातार रेलवे स्टेशन पर रह रही थी। इसने अपना नाम प्रियंका पुत्री राजेंद्र शौकद बताया, लेकिन इसके अलावा कोई अन्य जानकारी नहीं दी। आश्रम में लगातार छह महीने तक मानसिक बीमारी की दवाइयाँ और काउंसलिंग दी गई, जिसके बाद इसने अपने गांव का नाम बताया। यह एम.ए. (हिंदी) तक शिक्षित है। तत्पश्चात आश्रम की टीम ने गांव के सरपंच से संपर्क किया, जहां पता चला कि प्रियंका एक वर्ष से लापता थी। “हमारा प्रयास आश्रम” तथा हिसार रेलवे पुलिस के संयुक्त प्रयासों से प्रियंका को उसके परिवार से मिलवा दिया गया।

किसी सामाजिक व्यक्ति द्वारा सूचना दी गई कि एक महिला चिकनवास टोल के पास एक चाय के खोखे पर पिछले तीन दिनों से पड़ी हुई है। तुरंत प्रभाव से आश्रम की टीम ने उसे रेस्क्यू करके “हमारा प्रयास मंदबुद्धि महिला अनाथ आश्रम”, हिसार में लाया तथा इसकी सूचना नजदीकी थाने में भी दी गई। इस महिला ने अपना नाम “तासना” बताया। आश्रम में आने के बाद से इसकी मानसिक बीमारी की दवाइयाँ लगातार चल रही हैं।

इस मंदबुद्धि लड़की का नाम पूजा सैनी है, जो सैनी मोहल्ला, हिसार की रहने वाली है। इसकी सूचना इसके पड़ोस में रहने वाली एक महिला द्वारा “हमारा प्रयास मंदबुद्धि महिला अनाथ आश्रम” को दी गई। उन्होंने बताया कि इस लड़की की मां नहीं है तथा इसका पिता अत्यधिक शराब पीता है। घर में इसकी स्थिति अत्यंत दयनीय थी, क्योंकि यह कोई भी कार्य करने में सक्षम नहीं थी। यह हाथ-पांव से भी काफी लाचार है तथा इसे भोजन भी पड़ोसियों द्वारा दिया जाता था। इसके परिवार में पिता के अलावा कोई अन्य सदस्य नहीं है। “हमारा प्रयास आश्रम” की टीम ने इस लड़की को इसके घर से रेस्क्यू करके आश्रम हिसार में लाया।

इस लड़की की सूचना हिसार रेलवे पुलिस द्वारा हमारे पास आई थी। लगभग दो वर्ष पहले “हमारा प्रयास आश्रम” की टीम ने इसे रेलवे स्टेशन से नशे की हालत में रेस्क्यू करके आश्रम हिसार में लाया था। इसने अपना नाम सविता बताया तथा कहा कि एक व्यक्ति ने शादी का झूठा झांसा देकर इसे अपने साथ लाया और इसके हाथ जला दिए। इससे रेलवे स्टेशनों पर भीख मंगवाने का कार्य करवाया जाता था।